पट्टाभिषेक में सम्मलित होंगे कई गौशालाओं के नंदी
पैसों के लिए आकाश, ब्रह्माण, पाताल मण्डलेश्वर भी बना सकते हैं भगवाधारी
हरिद्वार। अपात्रों को धड़ाधड़ जगद्गुरु शंकराचार्य, आचार्य, महामण्डलेश्वर बनाए जाने के बाद अब एक गौ सेवक अपनी गौशाला के नंदी को जगद्गुरु बनाने जा रहा है। शीघ्र ही नंदी का पट्टाभिषेक कर उसको जगद्गुरु की पदवी से अंलंकृत किया जाएगा। उसके बाद अन्य नंदियों को आचार्य, महामण्डलेश्वर, श्रीमहंत व महंत बनाया जाएगा।
गौसेवक के मुताबिक जिस प्रकार से अपात्रों को सनातन के सर्वोच्च पदों से अलंकृत किया जा रहा है, उसको देखते हुए इन पदवी से पशु क्यों पीछे रहे। संन्यासी भगवान शिव का स्वरूप कहा जाता है। ऐसे में नंदी भगवान शिव के प्रथम गणों में आते हैं तो क्यों ना उनको भी जगद्गुरु, आचार्य, महामण्डलेश्वर, श्रीमहंत, महंत कारोबारी आदि बनाया जाए, जिससे उनका भी सम्मान बढ़े।
उल्लेखनीय है कि विगत एक सप्ताह में दो गृहस्थ संतों को जगद्गुरु की पदवी से अलंकृत कर दिया गया। जबकि जगद्गुरु वही कहा जाता है जो दिग्विजयी हो। अर्थात जिसने देश भर में भ्रमण कर शास्त्रार्थ के द्वारा विद्वानों को परास्त किया हो। उसके बाद वह जगद्गुरु कहलाता है, किन्तु यहां तो जिसे चाहो उसे जगद्गुरु बना दो। आज स्थिति ऐसी है कि किसी को भी कोई भी पद रेवड़ियों की तरह बांट दिया जा रहा है।
आश्चार्य की बात हो यह कि एक श्रीमहंत व आचार्य तथा अखाड़े के अन्य संत मिलकर जगद्गुरु बना रहे हैं। यह ठीक ऐसा ही है, जिस प्रकार से एक हाईस्कूल पास व्यक्ति इण्टरमीडिएट की परीक्षा पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करे और उसे उत्तीर्ण होने का प्रमाणपत्र उपलब्ध करा दे।
जबकि जगद्गुरु शंकराचार्य बनाने के लिए चार पीठों के शंकराचार्यों में से तीन की उपस्थिति न हो तो दो की उपस्थिति अनिवार्य होती है। इसके साथ ही जगद्गुरु शंकराचार्य का पट्टाभिषेक शकराचार्य को ही करने का अधिकार है। किन्तु यहां तो एक श्रीमहंत वह भी रिटायर्ड श्रीमहंत जगद्गुरु के पद बांट रहा है।
कुल मिलाकर सनातन को पलीता लगाने में ऐसे ही भगवाधरियों की मुख्य भूमिका है। आज श्रीमहंत जगद्गुरु बनाने लगे हैं। आने वाले समय में यह नए पदों का भी सृजन कर सकते हैं। आज जिसे देखो वही शंकराचार्य से कम पद लेना ही नहीं चाहता। अब आने वाले समय में ऐसे श्रीमहंत आकाश मण्डलेश्वर, ब्रह्माण मण्डलेश्वर, पाताल मण्डलेश्वर बना दें तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए। यहां तक की स्वंय को तो ये भगवान का प्रतिनिधि बताते ही है। अब यदि भगवान का बाप भी इनके द्वारा किसी को बताकर खड़ा कर दिया जाए तो हैरानी नहीं होनी चाहिए।
गौ सेवक के मुताबिक जगद्गुरु के पद पर नंदी के पट्टाभिषेक समारोह में विभिन्न गौशालाओं के करीब 50 नंन्दियों को आमंत्रण दिया जाएगा। इसके बाद यदि यह प्रयोग सफल रहा तो अन्य चार पैर वालों का भी पट्टाभिषेक किया जाएगा।


