हरिद्वार। आगामी संवत्सर में भी विश्व में उथल-पुथल मचे रहने की संभावना है। हालांकि भारत में इस उथल-पुथल का प्रभाव अधिक देखने को नहीं मिलेगा, किन्तु कुछ प्रभाव तो अवश्य ही पड़ेगा। हां तप बल से देश-दुनिया को बदल देने का दंभ भरने वाले कुछ तथाकथित बाबाओं के लिए यह वर्ष बड़ा कठिन होने की संभावना जतायी जा रही है।
ज्योतिष के मुताबिक ग्रहों की स्थिति के दृष्टिगत समूचे विश्व में हाहाकार मचेगा। हो सकता है कि एक मुस्लिम देश का अस्तित्व ही समाप्त हो जाए। भारत देश भी में भी उथल-पुथल का कुछ प्रभाव देखने को मिलेगा, किन्तु कुल मिलाकर भारत की स्थिति ठीक रहने वाली है।
ज्योतिष के मुताबिक यह वर्ष बाबाओं के लिए सबसे कठिन साबित होने वाला है। दावा किया जा रहा है कि इस वर्ष देश के कई बड़े बाबाओं के स्कैंडल खुलेंगे और उन्हें जेल की हवा तक खानी पड़ सकती है। स्कैंडल महिलाओं से जुड़ा होगा। वहीं किसी बाबा की हत्या के भी योग बनते नजर आ रहे हैं।
ज्योतिष के मुताबिक बाबाओं के बचने का केवल एकमात्र थोड़ा बहुत उपाय यह है कि वह अपनी जुबान पर लगाम रखें।
यदि ज्योतिष की भविष्यवाणी पर विश्वास करें तो इसकी फिल्म का ट्रेलर दिखायी देने लगा है। हाल ही में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और स्वामी आशुतोष का विवाद। साथ ही महाकाल की नगरी उज्जैन में भी इसकी झलक दिखायी देने लगी है।
महामण्डलेश्वर मंदाकिनी पुरी व उसके चेले पर महिला को ढाल बनाकर महामण्डलेश्वर स्वामी शांतिस्वरूप महाराज को दुष्कर्म के मामले में फंसाने के षडयंत्र का खुलासा होना तथा हाल ही में हरिद्वार में जूना अखाड़े से महामण्डलेश्वर स्वामी यतीन्द्रान गिरि और उनके शिष्य स्वामी प्रबोधानंद को निष्कासित करना और बाद में स्वामी यतीन्द्रानंद का निष्कासन रद्द करना। इसके बाद महामण्डलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि और जूना अखाड़े के बीच अरोप-प्रत्यारोपों की तलवारें खिचना है।
इसके अतिरिक्त उदासीन अखाड़े के एक संत द्वारा ब्रह्मलीन संत का करीब 40 लाख रुपये मूल्य का सोना चोरी करने का आरोप लगना। श्रीमहंत रघुमुनि महाराज का अखाड़े से निष्कासन और उसके बाद विवाद का न्यायालय में जाना, बड़े कारण हैं। मंदाकिनी पुरी का पलटवार करना। इसके अलावा और भी अन्य कारण हैं, जो संतों के आपस में लड़ने के कारण उजागर होने की संभावना है। जिसके चलते ज्योतिष के मुताबिक यह दावा किया जा रहा है कि जुलाई से सितम्बर माह तक किसी बड़े स्कैंडल में बड़े संत का चेहरा बेनकाब होने की संभावना है, जिस कारण से वह जेल की सलाखों के पीछे भी पहुंचे सकता है।


