सनातन और खालसा का अलगाव दोनों के लिए होगा विनाशकारीः नरसिंहानंद

शिवशक्ति धाम डासना में सिक्खों का एक प्रतिनिधिमंडल शिवशक्ति धाम डासना के पीठाधीश्वर यति नरसिंहानंद गिरि महाराज को मिलने और मानवता की रक्षा हेतु उनके प्रयासों का समर्थन करने शिव शक्ति धाम डासना पहुंचा।


सिक्खों के प्रतिनिधिमंडल से महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने कहा कि सनातनी और सिक्ख बिल्कुल सगे भाई हैं, जिनसे आपस में लड़ाई भी हो सकती है और मतभेद भी, परन्तु हमारा भविष्य और हमारे शत्रु एक ही हैं। यदि हमारे मतभेदों के कारण हमारे शत्रु मजबूत हुए तो हमारी आनी वाली पीढि़यों को सर्वनाश का सामना करना पड़ेगा। अगर ऐसा हुआ तो हमारे देवी-देवताओं सहित सिक्खों के दस गुरुओं का नाम इतिहास से मिट जाएगा, जिसके दोषी हिन्दू और सिक्ख दोनों होंगे।


सिक्ख प्रतिनिधिमंडल में बाबा बलदेव सिंह वला मुखी निहंग जत्थेबंधी तरना दल, नानकशाही संसार फाउंडेशन के अध्यक्ष सरदार सिंह माटा और सरदार रवि रंजन सिंह चेयरमैन झटका सर्टिफिकेशन अथॉरिटी ने भाग लिया। निहंग सतनाम सिंह अटारी वाला और जत्थेबंदी के अन्य सिंह भी शामिल हुए। धर्म रक्षा हेतु सिक्ख और सनातनी की सांझी रणनीति पर विचार हुआ व धरातल पर उतारने की योजना बनाई गयी। सिक्खों ने यति महाराज को पंजाब आने का निमंत्रण भी दिया। जिसे महाराज ने सहर्ष स्वीकार किया। तरना दल ने यति महाराज की सुरक्षा पर चिंता जताई और यति महाराज की रक्षा के लिए निहंग गार्ड और डासना पर महाराज के लिए एक निहंग छावनी बनाने का प्रस्ताव दिया।


निहंगों ने युवक-युवतियों को तलवार बाजी, तीरंदाजी, घुड़सवारी इत्यादि सिखाने के लिए अपनी छावनी पर आमंत्रित भी किया और साथ में ही महाराज से अनुरोध किया यदि कुछ युवक-युवतियों आप प्रशिक्षण हेतु भेजेंगे तो यह तरना दल का सौभाग्य होगा। निहंग जत्थेबंदी ने प्राचीन व लुप्त होते हुए शस्त्रों के महत्व पर भी बाबा से विचार विमर्श किया। लुप्त होती चक्र विधा के महत्व पर भी चर्चा हुई।

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