अखाड़े की संपत्ति और साधुओं की सुरक्षा को लेकर उठाए सवाल, निष्कासन के विरोध में एकजुट होने लगे नागा संन्यासी
हरिद्वार। एक अखाड़े से शंभू पंचों और अन्य नागा संन्यासियों के निष्कासन का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। कार्रवाई के विरोध में नागा संन्यासियों ने एकजुट होकर कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। उनका कहना है कि बिना उचित कारण संन्यासियों को अखाड़े से निष्कासित करना परंपराओं के खिलाफ है। इस मामले में जल्द ही देशभर में अखाड़े से जुड़े संतों के एकत्र होकर बड़ा निर्णय लेने की बात कही जा रही है। निष्कासित किए गए संतों में मढ़ी दरियाव, मढ़ी ब्रह्मनाथी, मढ़ी 10 के करीब एक दर्जन से अधिक नाम सामने आए हैं, जिनमें तीन हरिद्वार के बताए गए हैं।
कुछ नागा संन्यासियों ने अखाड़े की संपत्ति के रखरखाव और हिसाब-किताब पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि लंबे समय से संपत्ति से जुड़े मामलों में अनियमितताएं हो रही हैं। कुछ साधुओं के लापता होने और साधुओं की हत्या से जुड़े मामलों का हवाला देते हुए उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की है।
नागा संन्यासियों का कहना है कि अखाड़े की परंपराओं और व्यवस्थाओं को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने अखाड़े के संचालन, संपत्ति के प्रबंधन और वित्तीय हिसाब-किताब में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई है।
निष्कासित किए गए संन्यासियों के समर्थन में लामबंदी तेज होने के बीच विरोध करने वाले संतों ने आगे की रणनीति तय करने की बात कही है। उनका कहना है कि निष्कासन की कार्रवाई को लेकर संत समाज में असंतोष है और शीघ्र ही बड़ा कदम उठाया जाएगा। नागाओं का कहना है कि सड़क से लेकर पीएम, सीएम और न्यायालय तक कालनेमियों की पोल खोलने के साथ उनके काले कारनामे उजागर किए जाएंगे।

