हरिद्वार। माता ब्राह्मणी भारती ने आज वैदिक विधि के अनुसार संन्यास की दीक्षा ली। सन्यास दीक्षा लेने के बाद तृप्ता देवी से वे ब्राह्मणी भारती हो गयीं। संन्यास मार्ग स्थित श्री चेतनानंद गिरि आश्रम में उनका संन्साय कर्म व बिरजा होम आदि कर्म हुए।
इस अवसर पर माता ब्राह्मणी भारती को आशीर्वाद देते हुए श्री सूरतगिरि बंगला गिरिशानंद आश्रम के महामण्डलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरि महाराज ने कहाकि चार आश्रमों में संन्यास आश्रम का विशेष महत्व है। आज माता ब्राह्मणी भारती ने संन्यास दीक्षा लेकर धर्म प्रचार और भगवत भजन के मार्ग को अपनाया है। उन्होंने कहाकि वे अपने गुरु महामण्डलेश्वर स्वामी राजेश्वरानंद भारती के बताए मार्ग का अनुसरण करते हुए धर्म का प्रचार-प्रसार करने का कार्य करेंगी।
इस अवसर पर माता ब्राह्मणी भारती पठानकोट वाली ने सभी संतों का आभार व्यक्त करते हुए कहाकि उनके गुरु ने जो उन्हें शिक्षा दी है उसका वह अक्षरस पालन करते हुए धर्म के प्रचार-प्रसार व मानव सेवा के लिए समर्पित भाव से कार्य करेंगी। इस अवसर पर महामण्डलेश्वर स्वमी भागवतानंद गिरि, स्वामी विष्णुवल्लभानंद, स्वामी विश्व स्वरूपानंद गिरि महाराज ने भी अपने आशीर्वचन कहे। इस अवसर पर श्रीमहंत स्वामी रामांनद गिरि, स्वामी बालभारती, स्वामी कमलानंद गिरि, स्वमी कृष्णानंद गिरि, स्वामी ब्रह्मानंद, स्वामी उमाकांतानंद गिरि, स्वामी जगदीश्वरानंद गिरि आदि संतगण मौजूद रहे।

माता ब्राह्मणी भारती ने ली संन्यास दीक्षा


