विनोद धीमान
हरिद्वार। वन संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने वाला वन विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। लक्सर क्षेत्र के गोवर्धनपुर वन चौकी अंतर्गत खानपुर गांव में सरकारी भूमि पर खड़े हरे-भरे पेड़ों के अवैध कटान का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि यह कटान किसी बाहरी लकड़ी माफिया ने नहीं, बल्कि वन विभाग के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से कराया गया।
स्थानीय किसानों और शिकायतकर्ता मोनू व खेत स्वामी जोनी के अनुसार, सरकारी भूमि पर खड़े करीब आठ हरे पेड़ों को अवैध रूप से काटा गया, जिनमें सात यूकेलिप्टस और एक सिरस का पेड़ शामिल है। आरोप है कि पेड़ों की कटाई के बाद वन विभाग से जुड़े कर्मचारियों ने लकड़ी को ट्रैक्टर में भरकर मौके से गायब कर दिया।
मामले की जानकारी मिलने पर वन क्षेत्राधिकारी महेंद्र गिरी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान सात यूकेलिप्टस और एक सिरस के पेड़ कटे हुए पाए गए हैं। पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और यदि कोई भी कर्मचारी दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि गोवर्धनपुर वन चौकी क्षेत्र में इस तरह का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी खैर और शीशम जैसे बहुमूल्य हरे पेड़ों के अवैध कटान के आरोप वन विभाग के कर्मचारियों पर लग चुके हैं, लेकिन अब तक उन मामलों में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। यही वजह है कि स्थानीय लोगों में विभागीय कार्रवाई को लेकर गहरा संदेह बना हुआ है।
इस ताजा घटना ने एक बार फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और संभावित भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि विभाग वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई करता है या फिर वर्दी की आड़ में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा।
वहीं, वन विभाग के एसडीओ ज्वाला प्रसाद ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है। संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं और उनसे पूरे प्रकरण में स्पष्टीकरण तलब किया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।


