हरिद्वार (गणपत सिंह)। कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जनपद के गन्ना पर्यवेक्षकों एवं किसानों को गन्ने की लागत कम करने एवं उत्पादन बढ़ाने के गुर सिखाए गए।
आईटीसी मिशन सुनहरा कल एवं बायफ के तत्वाधान में आयोजित कार्यशाला में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक चौधरी विनोद कुमार ने कार्यशाला में गन्ने में लगने वाली बीमारियों की बारीकी से पहचान करने के साथ ही बीमारियों की रोकथाम करने के उचित उपाय बताएं। इसके साथ ही फसल में जल प्रबंधन के गुर सिखाए। कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी पुरुषोत्तम कुमार ने कहा कि जनपद में करीब 60 हजार हेक्टेयर में गन्ने की फसल लगाई गई है। जिसमें करीब 90 गन्ना की वैरायटी 0238 की बुवाई की गई है।
उन्होंने चीनी मिलों एवं गन्ना विभाग को चेतावनी देते हुए सचेताया कि यदि गन्ने की यह वैरायटी फेल हो गई तो इस देश के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। और इसे रिकवर करने के लिए 5 से 6 वर्ष का समय लगेगा। उन्होंने गन्ने की अन्य किस्म को भी सुरक्षित रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसानों को एक बात अच्छे से ध्यान रखनी चाहिए कि वह अपना पूरा गन्ना बुवाई के साथ ही बीज के लिए कुछ गन्ने की अलग से अच्छी प्रकार से ट्रीटमेंट करके बुवाई करें। जिससे उनके गन्ने में बीमारियां नहीं लगेगी और दवाइयों का खर्च बचेगा।
डॉ उमेश सक्सेना ने कहा कि किसानों को गन्ने की पत्तियों को जलाना नहीं चाहिए तथा मल्चर मशीन द्वारा पत्तियों को काटकर खेत में ही फैला कर उस से खाद बनाना चाहिए। इस मौके पर सीडीआई किरण टम्टा, सीडीआई रणधीर सैनी, राहुल चौधरी, गणपत सिंह, अमित बेलवाल, राकेश कुमार, विपुल सैनी, रीना देवी आदि मौजूद रहे।


