कांजी को आयुर्वेद में एक चमत्कारी पेय भी कहा जाता है, जो आपके शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाती है। यह एक फर्मेंटेड ड्रिंक होती है, जिसे पानी, काली गाजर, चुकंदर, राई या पीली सरसों, आंवला, हल्दी और काली मिर्च के फर्मेंटेशन से बनाया जाता है।
एक कांच के जार को गरम पानी से धो कर सुखा कर लीजिए. इसमें कटी हुई 4 गाजर, 2 आंवला हल्दी 1 बड़ा चकुंदर डालें 50 ग्राम कच्ची हल्दी के टुकड़े 1 छोटी चम्मच सादा नमक, 2 छोटी चम्मच काला नमक) छोटी चम्मच दरदरी कुटी काली मिर्च, 1 पिंच हींग और 2 बड़े चम्मच दरदरी कुटी राई या पीली सरसों डालिए. अब इन्हें अच्छे से मिलाएं, फिर इसमें उबालकर ठंडा हुआ हुआ पानी डाल कर अच्छे से मिला कर सूती कपड़े से ढाक दीजिए. इसे ढाक कर 3 से 4 दिन तक धूप में रखिए और शाम में अंदर रख लीजिए। अगर धूप ना हो तो रसोई में किसी गरम जगह रखिए। चौथे दिन इसे खोलकर मिलाकर परोसें, इस तरह ये बनकर तैयार हो जाएगा।
सुबह एक गिलास खाली पेट पिएं
कांजी पीने से इम्यूनिटी मजबूत होती है।
इसमें में घुलनशील फाइबर होता है, जो पाचन के लिए फायदेमंद होता है क्योंकि वो गुड बैक्टीरिया का भोजन होता है। कांजी में प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो आंतों के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। एनर्जी का स्तर बढ़ता है। सूजन कम होती है। वजन नियंत्रण में रहता है। मेटाबॉलिक रेट बढ़ती है। आंखों की कमजोरी दूर होती है।
गाजर बीटा कैरोटीन और विटामिन-ए, सी, के और जिंक से भरपूर होता है। वहीं चुकंदर एंटी ऑक्सीडेंट और विटामिन-सी से भरपूर होता है। इससे बनने वाली कांजी पोषक तत्वों का खजाना है। एंटीऑक्सीडेंट शरीर में मुक्त कणों (फ्री रेडिकल्स) को निष्क्रिय करने, ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।
गुड बैक्टीरिया, प्री बायोटिक, प्रोबायोटिक्स, स्ट्रेस, डिप्रेशन, एंजायटी, इम्युनिटी, ऑटोइम्यून हमारे शरीर की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है ।बैक्टीरिया जो हमारे शरीर की रक्षा प्रणाली विकास और पुनर्निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण साधन है।
क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर के अंदर विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया रहते हैं? माना जाता है की बैक्टीरिया बीमारी पैदा करते हैं, लेकिन उनमें से सभी हानिकारक नहीं होते हैं, सच तो यह है की उनमें से ज्यादातर कुछ नुकसान नहीं पहुंचाते हैं और जीवन के लिए आवश्यक हैं। 5,000 से ज्यादा प्रकार के बैक्टीरिया पेट-आंत में पाए जाते हैं। इनमें से कुछ मित्र होते हैं व कुछ शत्रु। ज्यादातर लोगों को लगता है कि बैक्टीरिया माने बीमारी। और वे उन्हें परास्त करने की अंधाधुंध लड़ाई का हिस्सा बन जाते हैं। लेकिन बाद हमें पता चला कि सारे बैक्टीरिया हमारे शत्रु नहीं होते हैं। कुछ अच्छे बैक्टीरिया भी हैं जो हमारे शरीर में एक मित्र की तरह मौजूद हैं। यह कई तरह के घातक हमलों से हमारी रक्षा करने की क्षमता रखते हैं।
कुछ बैक्टीरियाज ऐसे होते हैं जो हमारी सेहत की रक्षा करने के लिए दवाओं तक से लड़ जाते हैं पर हम उनके बारे में जान ही नहीं पाते और उनका अंधाधुंध कत्ल करते रहते हैं। ये उन बीमारियों से भी शरीर की रक्षा करने में सक्षम है जिनपर एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर हो चुकी हैं। यह विश्वास करना मुश्किल हो सकता है लेकिन वास्तव में 100 ट्रिलियन बैक्टीरिया हमारे शरीर में होते हैं, जिनमें से अधिकांश आंत में पाए जाते हैं। उन्हें आँतों के फूल कहा जाता है और इसका वजन लगभग 600 ग्राम से 1.5 किलोग्राम होता है जितना हमारे लिवर का वजन है।
आपको पता होना चाहिए कि हम बैक्टीरिया के बिना नहीं रह सकते-ये वे हैं जो भोजन के पाचन में और हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं ताकि हम इन्फेक्शन से लड़ सकें और आराम से रह सकें। वे कई मायनों में हमारे हेल्थ हीरोज हैं। अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को विकसित करने के लिए हमें बैक्टीरिया की आवश्यकता होती हैय विशेष रूप से हमारी आंत में जिसमें हमारे शरीर की लगभग 70 प्रतिशत प्रतिरोधक क्षमता होती है। ये बैक्टीरिया रोगों की गंभीरता को कम करने वाली हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पाचन तंत्र में बैक्टीरिया पोषक तत्वों को शोकने के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें हमारे शरीर पचा नहीं पाते हैं। आप यह जानकर हैरान होंगे की खाने से लगभग 30 प्रतिशत कैलरी हमारे आंत के बैक्टीरिया की मदद से मिलते हैं। हमारी आंतों की दीवारों को सुरक्षित रखने रिपेयर करने में सबसे बड़ा दायित्व यही सूक्ष्म यौद्धा व श्रमिक निभाते हैं जिससे हमारी रक्तवाहिकाओं में प्रदूषित रक्त का प्रवाह रूकता है। कोई भी अल्सर या कैंसर शरीर में तभी पनपता है खासकर आंतों और लीवर में जब आपकी आंतों में ये सूक्ष्म यौद्धा कमजोर व संख्या में कम पड़ जाते हैं।
विटामिन बी-12 के लिए मांसाहार की आवश्यकता नहीं, कुछ बैक्टीरिया हमारी आँतों में विटामिन्स बना सकते हैं, जैसे की विटामिन के और विटामिन बी 12। खाना पकाने से विटामिन बी आसानी से नष्ट हो जाता है और हम में से कई इस महत्वपूर्ण विटामिन की कमी से पीडि़त हैं। बैक्टीरिया इसे दूर करने में मदद कर सकते हैं। हमारे मूड को प्रभावित करता है-गुड बैक्टीरिया बायो फर्मेंटेशन से विटामिन बी 12 का निर्माण करता है।
क्या कभी आप घबराहट या डर से बीमार पड़े हैं या आपके पेट में हलचल मची है। वैज्ञानिकों के अनुसार हमारे आंत के बैक्टीरिया डोपामाइन और सेरोटोनिन (हमारे आँतों के अच्छे हार्मोन हैं ये) जैसे हार्मोन का उत्पादन करके हमारे मूड को प्रभावित कर सकते हैं जो तनाव और चिंता को कम करते हैं। ये नन्हे बैक्टीरिया भयंकर से भयंकर डिप्रेशन से बाहर निकाल सकते हैं।
इसलिए अच्छे बैक्टीरिया को बनाए रखना हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है। एक अच्छी तरह से संतुलित आहार लेना, व्यायाम, पर्याप्त नींद, अधिक फाइबर, पानी और प्रोबायोटिक्स, ये सारे जीवन के लिए आवश्यक बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं। अगर किसी व्यक्ति को हर समय पेट में भारीपन या फूला हुआ महसूस होता है, कब्ज या दिन में दो या ज्यादा बार मल त्याग करना पड़ता है, मुंह की उचित साफ-सफाई के बावजूद भी सांसों से दुर्गंध आती है। इसका मतलब आपकी आंत अस्वस्थ है। वहां बैड बैक्टीरिया या बुरे परजीवी अपना घर बना रहे हैं। इस पर पूरी पुस्तिका लिखी जा सकती है 42 तरह से शरीर में काम करते हैं ये नन्हे हीरो।
Dr. (Vaidhya) Deepak Kumar
Adarsh Ayurvedic Pharmacy
Kankhal Hardwar
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