नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हरिद्वार में हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के द्वारा कृषि व बागों की भूमि पर अवैध तरीके से प्लॉटिंग व ग्रुप हाउसिंग की अनुमति उच्च न्यायलय व सर्वोच्च न्यायलय के आदेश के विरुद्ध जाकर दिए जाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायधीश मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ ने हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण को निर्देश दिए हैं कि वे अपना आदेश एक सप्ताह में वापस लें, नहीं लेने पर कोर्ट अवमानना की कार्यवाही शुरू करेगी, क्योंकि यह उच्च न्यायलय व सर्वोच्च न्यायलय के आदेश की अवहेलना है।
मामले के अनुसार हरिद्वार निवासी अतुल कुमार चौहान ने जनहित याचिका दायर कर कहा कि उच्च न्यायलय ने 19 जून 2018 को एक जनहित याचिका में आदेश जारी कर कहा था कि कृषि व बागों की भूमि पर प्लाटिंग व ग्रुप हाउसिंग नहीं की जा सकती। प्रदेश में कृषि व बागों की भूमि सीमित है। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायलय में बिशेष अपील दायर की। 30 अप्रैल 2024 को सर्वोच्च न्यायलय ने सरकार की अपील को निस्तारित करते हुए कहा कि उच्च न्यायलय के आदेश में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है, चाहे तो राज्य सरकार इस आदेश में संशोधन करने के लिए उच्च न्यायलय में जा सकती है, लेकिन राज्य सरकार उच्च न्यायलय नहीं गई।
इसी बीच हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण ने अपनी बोर्ड मीटिंग में एक आदेश जारी किया। जिसमें कहा कि वे कृषि व बागों की भूमि पर प्लॉटिंग कर सकते हैं। इसके बाद प्लॉटिंग की अनुमति दी। जनहित याचिका में कहा गया कि एचआरडीए ने सर्वोच्च न्यायलय व उच्च न्यायलय के आदेश को न मानते हुए यह अनुमति दी है, जिसकी वजह से हरिद्वार के कई क्षेत्रों में कृषि व बाग की भूमि नहीं बची है। यह जनहित याचिका उनके द्वारा 2023 में दायर की गयी थी। जिस पर आज सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान याचिककर्ता की तरफ से कहा गया कि 4 सितम्बर 2023 को भी कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अगर कृषि भूमि पर प्लॉटिंग की रोक है तो उस आदेश का अनुपालन किया जाये, लेकिन आज की तिथि तक उन आदेशों का अनुपालन नहीं हुआ। उन आदेशों के विरुद्ध जाकर कृषि भूमि पर प्लॉटिंग की अनुमति दी जा रही है। इसलिए पूर्व के आदेशों का अनुपालन करवाया जाये।


