शिक्षक, कर्मचारियों ने की पुरानी पेंशन बहाली की मांग, किया प्रदर्शन

हरिद्वार। पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन जनपद हरिद्वार के तत्वाधान में हजारों शिक्षक कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने राज्य और केंद्र सरकार से एनपीएस को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना बहाली की मांग की।


शिक्षक कर्मचारियों ने एनपीएस की शव यात्रा निकाला और पुतला दहन किया। नई पेंशन योजना की शव यात्रा और पुतला दहन कार्यक्रम को हरिद्वार जिले के शिक्षा विभाग, सिंचाई विभाग, चिकित्सा विभाग, लिथो प्रेस, वन विभाग, जल संस्थान, राज्य कर विभाग, लोक निर्माण विभाग, परिवहन विभाग, आईटीआई सहित अन्य संगठनों ने समर्थन दिया। प्रदर्शन के दौरान हजारों शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। एनपीएस की शव यात्रा सैनी आश्रम निकट तहसील कार्यालय जवालापुर हरिद्वार से शुरू होकर रानीपुर मोड़ तक पहुंची। जहां पर प्रदर्शनकारियों ने एनपीएस का पुतला फूंका और नई पेंशन योजना का विरोध किया। इस दौरान शिक्षकों ने सरकार से पुरानी पेंशन योजना को पुनः बहाल करने की मांग की।


पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन के हरिद्वार जिला अध्यक्ष रोहित कुमार शर्मा ने कहा केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2004 को और उत्तराखंड सरकार ने 1 अक्टूबर 2005 से पुरानी पेंशन योजना को समाप्त कर शेयर बाजार पर आधारित पेंशन स्कीम को जबरन शिक्षक कर्मचारियों के ऊपर थोप दिया था। सरकार ने शिक्षक कर्मचारियों की पेंशन समाप्त कर उनके बुढ़ापे का सहारा को उनसे छीन लिया और बुढ़ापे की लाठी को तोड़ दिया।


रोहित शर्मा ने कहाकि जहां नेता, विधायक, सांसद आज भी चार-चार और पांच-पांच पेंशन ले रहे हैं। वहीं, शिक्षक कर्मचारियों को मिलने वाली एक पेंशन को भी समाप्त कर दिया गया है। भारत में नेताओं कर्मचारियों के लिए अलग-अलग विधान बना है। जिसे शिक्षक कर्मचारी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस अन्याय के खिलाफ लगातार संघर्ष करेंगे और पुरानी पेंशन बहाल कराकर ही रहेंगे। कहाकि सेवानिवृत्ति शिक्षक कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पुरानी पेंशन योजना को पुनः बहाल कर दिया। उत्तराखंड और केंद्र सरकार को भी जल्द से जल्द पुरानी पेंशन योजना को पुनः बहाल करना चाहिए। भविष्य में शिक्षक कर्मचारी चुनाव में उसी दल को समर्थन करेंगे, जो पुरानी पेंशन योजना को पुनः बहाल करने का लिखित वादा करेगा। वक्त रहते यदि वर्तमान राज्य और केंद्र सरकार इसे बहाल नहीं करती तो शिक्षक कर्मचारी कठोर निर्णय लेने को बाध्य होंगे।

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