अखिल भारतीय पुजारी महासंघ उज्जैन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर देश में अखाड़ों और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद को समाप्त करने की मांग की है। महासंघ ने अखाड़ों पर व्यावसायीकरण, आपसी विवाद और अतिक्रमण जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए सनातन परंपरा में ऋषि-मुनि परंपरा को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता बताई है।
अखिल भारतीय पुजारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि सनातन धर्म की मूल परंपरा ऋषि-मुनियों की रही है, न कि अखाड़ों की। उनका कहना है कि अखाड़ों की स्थापना जिस उद्देश्य से की गई थी, वह अब काफी हद तक पूरा हो चुका है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि आदी शंकराचार्य ने लगभग ढाई से तीन हजार वर्ष पहले सनातन धर्म की रक्षा के लिए अखाड़ों की स्थापना की थी। लेकिन वर्तमान समय में कई अखाड़ों में साधु-संत पद, प्रतिष्ठा और ऐश्वर्य को लेकर आपसी विवादों में उलझे हुए हैं। हाल ही में उज्जैन में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर हुए विवाद का हवाला देते हुए महासंघ ने कहा कि ऐसी घटनाएं सनातन धर्म की छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं।
महासंघ ने यह भी आरोप लगाया कि आज कई अखाड़े व्यावसायिक केंद्र बनते जा रहे हैं। साधु-संतों के निवास के लिए दिए गए स्थान अब गार्डन और यात्री गृह में बदल चुके हैं, जिनसे करोड़ों रुपये की आय हो रही है। इसके बावजूद सिंहस्थ जैसे आयोजनों के नाम पर सरकार से भारी धनराशि की मांग की जाती है, जबकि साधु-संतों को त्याग, तप और भजन में लीन रहना चाहिए।
पत्र में कहा गया है कि संतों के लिए दीक्षा के बाद जमीन खरीदना-बेचना अनुचित माना जाता है, फिर भी कई स्थानों पर सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण के आरोप सामने आए हैं। महासंघ ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि जांच होने पर साधु-संतों के नाम पर बड़ी मात्रा में जमीन सामने आ सकती है।
महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि त्रेता युग में भगवान राम को सप्त ऋषियों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ था, जिसके आधार पर रामराज्य की स्थापना हुई। उन्होंने कहा कि उसी परंपरा को पुनर्स्थापित करने के लिए देश में अखाड़ा परिषद को समाप्त कर ऋषि परंपरा को बढ़ावा देने के लिए कानून बनाया जाना चाहिए।


