स्वामी अविमुक्तेश्वरांद के शंकराचार्य विवाद पर सभी अखाड़ों को नहीं है बोलने का अधिकार: गोपाल गिरि

फर्जी शंकराचार्यों के खिलाफ आवाज बुलंद करें अखाड़े , सरकार कराए संतों की जांच
हरिद्वार।
श्री पंच शंभू दशनाम आवाह्न अखाड़े के श्रीमहंत गोपाल गिरि महाराज ने स्वामी अविमुक्तेश्वरांद के शंकराचार्य होने या न होने को लेकर चले आ रहे विवाद पर अखाड़ों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहाकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य हैं या नहीं इसका उन अखाड़ों को कोई अधिकार नहीं है, जिनका गठन अभिनव शंकराचार्य जी के सन् 821 मंे कैलाशवास के बाद हुआ।


श्रीमहंत गोपाल गिरि महाराज ने कहाकि हरिद्वार में ही कितने जगतगुरू बने बैठे हैं। उन पर किसी भी अखाड़े के संत की बोलने की हिम्मत नहीं होती। एक जगतगुरु एक अखाड़े के मण्डलेश्वर हैं, फिर भी वह शंकराचार्य बनकर घूमते हैं। ऐसे में अखाड़ों को सबसे पहले ऐसे बहुरूपिए संतों के खिलाफ मोर्चा खोलना चाहिए। कहाकि जो अपने को जगद्गुरु लिखते हैं उनसे पूछना चाहिए की वह कहां के जगद्गुरु हैं। पर पूछे कैसे इनको इस बात का ज्ञान तब हो न जब ऐसे लोगों ने कभी मठाम्नाय पढ़ा हो। किस मठ में कौन आचार्य होते हैं। बिना ज्ञान के शंकराचार्य बनकर समाज और धर्म को धोखा देने का काम बखूबी कर रहे हैं।

श्रीमहंत ने कहाकि कौन किस मठ का आचार्य है और कौन नहीं इसका फैसला आदी शंकराचार्य से जुड़े अखाड़े करेंगे। जिन अखाड़ों की उत्पत्ति आदी शंकराचार्य जी के कैलाशवास के बाद हुई है उनको इस विषय मंे बोलने का अधिकार नहीं होना चाहिए। कहाकि ऐसे अखाड़ों के संत किसी को भी जगद्गुरु और आचार्य बनाते फिर रहे हैं। जिन लोगों के पास संयम नहीं है और ज्ञान के मामले में जो शून्य हैं वहीं आज पीएचडी का प्रमाणपत्र देते घूम रहे हैं।


श्रीमहंत ने कहाकि जो साधु होते हुए भी साधुओं का शोषण कर रहे हैं वहीं साधुओं के आका बने घूम रहे हैं। कितने तो ऐसे हैं, जिन्हें अपने गुरु तक का पता नहीं। जहां माल देखा वहीं नया गुरु बना लेते हैं। श्रीमहंत ने कहाकि कुछ संत बच्चों का शोषण करते हैं और नशे की ओर धकलने का कार्य करते हैं। तंत्र-मंत्र के नाम पर भी बच्चों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे लोगों की सरकार को जांच करानी चाहिए, जिससे समाज में फैले इस घिनौने कृत्यों से बच्चों और समाज को बचाया जा सके।

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