मनाही के बावजूद भंडारा खाना आठ संतों को पड़ा भारी, अखाड़े से निष्कासित

प्रयागराज में भंडारे में शामिल होने पर कार्रवाई, कुछ संत पहले भी हो चुके हैं निष्कासित, अखाड़े में शह-मात की बिसात से जुड़ा मामला

हरिद्वार। अखाड़े की कथित मनाही के बावजूद भंडारे में शामिल होना आठ संतों को भारी पड़ गया। अखाड़े ने कार्रवाई करते हुए आठ संतों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। निष्कासित संतों में कुछ ऐसे भी बताए जा रहे हैं, जो पूर्व में भी अखाड़े से निष्कासित हो चुके हैं। वहीं, एक संत पर पूर्व में ही अखाड़े की लाल कलम चल चुकी है, जिसके चलते उनके भविष्य में कारोबारी या महंत बनने पर रोक लगाई गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, करीब पांच दिन पहले प्रयागराज में एक अखाड़े के संत की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया था। बताया जा रहा है कि अखाड़े की ओर से संतों को इस भंडारे में शामिल नहीं होने की हिदायत दी गई थी। इसके बावजूद कुछ संत भंडारे में पहुंच गए। इसे अखाड़े के आदेशों की अवहेलना मानते हुए आठ संतों के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई कर दी गई।
कार्रवाई के बाद निष्कासित संतों और उनके समर्थकों में खासा रोष बताया जा रहा है। वहीं, भंडारे में शामिल होने की मनाही और इसके पीछे की परिस्थितियों को अखाड़े के भीतर चल रही खेमेबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है।

भंडारे के बहाने दूसरे खेमे को मात देने की कोशिश
सूत्रों की मानें तो भंडारे का निमंत्रण और उसमें शामिल होने की मनाही के पीछे शह-मात की बिसात बिछी हुई थी। भंडारे का आयोजन करने वाले संत कथित तौर पर मनाही का फरमान जारी करने वाले दूसरे खेमे के प्रमुख को मात देने के लिए अपना समर्थन जुटाने की कोशिश में थे। हालांकि, इस रणनीति का पासा उलटा पड़ गया और भंडारे में शामिल होने वाले संतों को ही निष्कासन का सामना करना पड़ा।
बताया जाता है कि पूर्व में इसी खेमेबाजी के चलते भंडारे का आयोजन करने वाले संत ने श्रीमहंत का पद नहीं लिया था। सूत्रों के अनुसार, पद पर बने रहने की स्थिति में उन्हें संपत्ति संबंधी नुकसान की आशंका थी। इसी के चलते उन्होंने भंडारे के आयोजन के जरिए दूसरे खेमे को घेरने की रणनीति बनाई थी।

पहले भी हो चुकी है कुछ संतों पर कार्रवाई
निष्कासित संतों में कुछ ऐसे बताए जा रहे हैं, जिन्हें पूर्व में दो बार अखाड़े से बाहर किया जा चुका है। वहीं, एक संत गांजे के मामले में पकड़े जाने के बाद अखाड़े की कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, उनके खिलाफ अखाड़े में ऐसी व्यवस्था लागू की गई थी, जिसके तहत वह भविष्य में कारोबारी या महंत नहीं बन सकते। इसके अतिरिक्त एक संत ऐसे भी बताए जा रहे हैं, जो लगातार अखाड़े के खिलाफ बयानबाजी करते रहे हैं।

निष्कासित संतों के नाम
सूत्रों के मुताबिक, कार्रवाई की जद में आए संतों के नाम इस प्रकार बताए गए हैं।

  1. महंत प्रकाश पुरी महाराज, मढ़ी दरियाव, श्री भीमनाथ महादेव, मेहसाणा, गुजरात।
  2. श्री दिगंबर रघुनाथ गिरि महाराज, मढ़ी 10-4, इस्मानी माता मंदिर, डीसा, गुजरात।
  3. दिगंबर उमेश गिरि महाराज, मढ़ी ओंकारी, चाणोद, वडोदरा, गुजरात।
  4. दिगंबर आलोक गिरि महाराज, मढ़ी 10-6, हरिद्वार, उत्तराखंड।
  5. दिगंबर प्रमोद गिरि महाराज, मढ़ी परमानंदी, ब्यावर, राजस्थान।
  6. दिगंबर सुनील गिरि महाराज, मढ़ी गादी बघेल मठ, मेहसाणा, गुजरात।
  7. दिगंबर रामकुमार गिरि महाराज, मढ़ी 10-6, इंदौर, मध्य प्रदेश।
  8. पवनेश पुरी, मढ़ी दरियाव।

हालांकि, निष्कासन की कार्रवाई और संतों के नामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। इिस पूरे घटनाक्रम को अखाड़े के भीतर चल रही खेमेबाजी और आपसी खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।

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