अब निष्कासित महामण्लेश्वर के पत्तल निष्कासन की योजना, भण्डारों में जाने पर लगेगी रोक

हरिद्वार। बाबाओं के एक के बाद एक कांड सामने आने के बाद अब सज्जन संतों के बीच एक नई बहस छिड़ गयी है। संत समाज इस दिशा में कुछ ठोस कदम उठाने जा रहा है। इसके चलते सर्वप्रथम वह हरिद्वार के एक महामण्डलेश्वर का पत्तल निष्कासन की योजना को अमल में लाने पर चर्चा कर रहा है।


उल्लेखनीय है कि दशनामी अखाड़ों में से एक अखाड़े ने कुछ समय पूर्व दो महामण्डलेश्वरों को अखाड़े से वहिष्कृत कर दिया था। जांच के बाद अखाड़े ने एक महामण्डलेश्वर के वहिष्कार को समाप्त करते हुए अखाड़े में वापसी करवा दी, किन्तु दूसरे का वहिष्कार आज भी जारी है।


महामण्डलेश्वर के वहिष्कार के बाद पांच अखाड़ों में महामण्डलेश्वर के भण्डारे आदि में बुलाने पर रोक लग गयी। वहीं वहिष्कार के बाद भी महामण्डलेश्वर का भण्डारे आदि में अन्य अखाड़ों-आश्रमों में जाना जारी रहा। चर्चा है कि भण्डारे में न बुलाने पर भी महामण्डलेश्वर की उपस्थिति देखी गयी। चर्चा के दौरान सामने आया की भण्डारे में न बुलाने पर महामण्डलेश्वर फोन करके अपनी नाराजगी व्यक्त तक करते देखे गए। जिसके बाद आश्रम-अखाड़ा संचालकों को कहना पड़ता है कि अभी भण्डारा शुरू नहीं हुआ है। इतना कहते ही महामण्डलेश्वर चंद मिनटों में भण्डारा स्थल पर मौजूद मिलते हैं।


संतों में चर्चा है कि जब एक महामण्डलेश्वर को अखाड़े से वहिष्कृत किया हुआ है तो उसे निमंत्रण देने का कोई औचित्य नहीं। यदि कोई बुलाता है तो वह गलत है। यदि महामण्डलेश्वर बिना बुलाए पधारते हैं तो भी उचित नहीं कहा जा सकता। इन सबको देखते हुए अब महामण्डलेश्वर का पत्तल वहिष्कार किए जाने की योजना को अमल में लाए जाने की तैयारी की जा रही है। जिसके चलते अब अन्य अखाड़ों-आश्रमों में होने वाले भण्डारों में महामण्डलेश्वर का एक तरह से प्रवेश निषेध हो जाएगा।
कुछ संत महामण्डलेश्वर के इस कृत्य के चलते खासे रोष में देखे गए। उनका कहना था इस संबंध में शीघ्र ही महामण्डलेश्वर के खिलाफ पत्तल वहिष्कार का फरमान जारी किया जाएगा। यदि ऐसा है तो संत समाज में महामण्डलेश्वर की मुश्किलंे बढ़ सकती हैं और भण्डारों से होने वाली आय पर भी ग्रहण लग सकता है।

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