सनातन धर्म की रक्षा के लिये संत और समाज का समन्वय आवश्यकः यति नरसिंहानंद

हरिद्वार। श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने आज श्री अखंड परशुराम अखाड़ा के अध्यक्ष पण्डित अधीर कौशिक, स्वामी अमृतानंद, स्वामी ललितानंद, स्वामी परमानंद, स्वामी सत्यवृतानंद सरस्वती, स्वामी बलराम मुनि, विनोद महाराज, भैरव सेना के अध्यक्ष मोहित चौहान के साथ 17 से 19 दिसम्बर 2021 को हरिद्वार में होने वाली धर्म संसद की सफलता के लिए बिल्वकेश्वर महादेव मंदिर में पूजा अर्चना की।
इस अवसर पर पत्रकारों से वार्ता करते हुए यति नरसिंहानंद गिरी ने कहा कि आज घटते हुए हिन्दू जनसंख्या अनुपात ने तय कर दिया है कि 2029 में भारत का प्रधानमंत्री मुसलमान होगा। अगर ऐसा हुआ तो केवल अगले बीस वर्षों में 40 प्रतिशत हिन्दुओं का कत्ल हो जाएगा। 50 प्रतिशत हिन्दू धर्म परिवर्तन करके मुसलमान बन जायेंगे और बचे हुए 10 प्रतिशत हिन्दू या तो शरणार्थी शिविर में रहेंगे या विदेशों में रहेंगे। उन्होंने कहाकि भारत का प्रधानमंत्री मुसलमान होने का अर्थ अपनी अंतिम शरणस्थली में सनातन का सम्पूर्ण विनाश होगा। इस समस्या पर विचार करके इसका समाधान खोजने के लिए ही यह धर्म संसद आयोजित की जा रही है।
उन्होंने बताया कि धर्म संसद में सम्पूर्ण देश से सौ से ज्यादा हिन्दू संगठनों के प्रतिनिधि और धर्मगुरु भाग लेंगे। स्वामी अमृतानंद ने कहा कि आज हिन्दू समाज अपने धर्म को ना जानने के कारण इस दुर्गति को प्राप्त हुआ है। अगर हिन्दू समाज को अपने अस्तित्व को बचाना है तो अपने धर्म को समझ कर संघर्ष करना पड़ेगा। अगर हिन्दू समाज अब भी संघर्ष नहीं करेगा तो कोई भी देवता या अवतार अब हिन्दू को बचा नहीं सकता। अब हिन्दू को अपने बच्चों के भविष्य को नेताओ के भरोसे पर न छोड़कर स्वयं प्रयास करना पड़ेगा।

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