राज्यपाल न बनाने की टीस में भाजपा के खिलाफ जहर उगलने को मजबूर हुए फर्जी शंकराचार्य!

हरिद्वार। फर्जी शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज के भाजपा के खिलाफ दिए बयान के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भाजपा नेताओं ने फर्जी शंकराचार्य के बयान को संजीदगी से लिया है। जिसके बाद से फर्जी शंकराचार्य के खिलाफ कुछ बड़ा हो सकता है।


उल्लेखनीय है कि 15 फरवरी को आयोजित हिन्दू सम्मेलन में फर्जी शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने भाजपा को लताडते हुए था कहा कि संघ को 100 वर्षो में जितना बढ़ाना चाहिए था वह भाजपा की वजह से नही बढ़ सका। संघ के विचार को सबसे ज्यादा पलीता भाजपा ही लगा रही है। राजनीति तोड़ती है जोड़ती नहीं। सभी राज नेताओ का चाल चरित्र एक है। संघ का स्वयंसेवक भाजपा का गुलाम नहीं है। लोग टिकट के चक्कर में संघ में ना जाए। इसके अलावा और बहुत कुछ बोलते हुए उन्होंने भाजपा पर हमला बोला था।भाजपाई सूत्रों के मुताबिक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने स्वामी राजराजेश्वराश्रम के बयान का संज्ञान लिया है और उन्होंने बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। सूत्रों का कहना है कि नेताओं को इनके दरबार से दूरी बनाए रखने का भी इशारा कर दिया गया है।


सूत्र बताते हैं कि स्वामी राजराजेश्वराश्रम का भाजपा के खिलाफ यह बयान उनकी खिसयाहट को दर्शाता है। स्वामी राजराजेश्वराश्रम एकमात्र ऐसे पहले साधु हैं, जिन्होंने स्वंय के राज्यपाल बनने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाया। बावजूद इसके भाजपा ने इन्हें राज्यपाल नहीं बनाया। जिसके चलते अब ये अपनी खिसयाहट में भाजपा के खिलाफ ही जहर उगलने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने राज्यपाल जैसे गरिमापूर्ण पद के लिए स्वामी से दूरी इसलिए बनायी होगी की जो व्यक्ति सदैव आधा नंगा रहता हो वह राज्यपाल जैसे पद के योग्य हो ही नहीं सकता। यदि बना दिया जाता तो राजभवन में भी इनकी वेशभूषा ऐसी ही रहती जिससे पद और राजभवन दोनों की गरिमा को ठेस पहुंचती। सूत्र बताते हैं कि जिस प्रकार से स्वामी राजराजेश्वराश्रम का भाजपा के प्रति नजरिया सामने आया है, उससे आए दिन इनके दरबार में माथा टेकने वाले नेतागण दूरी बना सकते हैं।


वहीं शहर में चर्चा इस बात की भी जोरों पर है की जिस आश्रम में स्वामी राजराजेश्वराश्रम का कब्जा है वह विवादित है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में आए दिन संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों का वहां पहंुचना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता। वहीं जब स्वामी अविमुक्तेश्वरांनद सरस्वती के शंकराचार्य होने पर सवाल उठाया गया है तो ये कहां के शंकराचार्य बने हुए हैं। ऐसे फर्जी व्यक्ति के खिलाफ भी कार्यवाही होनी चाहिए।

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