हरिद्वार। हरिद्वार से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने राजनीति, प्रशासन और इंसानियत, तीनों को सवालों के घेरे में ला खड़ा कर दिया है। पर्दे के पीछे चल रही कथित राजनीतिक रणनीति का खामियाजा एक पूरा परिवार भुगत रहा है। मां, पत्नी और बहन के छलकते आंसू इस सवाल को और गहरा कर देते हैं कि क्या चुनावी राजनीति अब मासूम जिंदगियों तक पहुंच गई है?
बीते दिनों नूरपुर पंजनहेड़ी में उषा टाउनशिप के बाहर गोली चलने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया था। जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित चौहान के भाई सचिन चौहान और रिश्तेदार कृष्णपाल गोली लगने से जख्मी हो गए थे। दोनों का एम्स में इलाज चल रहा है। जबकि गोली चलाने की घटना में शामिल अतुल चौहान ने खुद को सिलेंडर कर दिया था। अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे है। पुलिस ने अमित चौहान की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया। जबकि क्रास मुकदमा अतुल चौहान की पत्नी की शिकायत पर भी दर्ज किया गया है। पुलिस दोनों की मुकदमों की विवेचना कर रही है।
अमित चौहान की मां उषा देवी ने बताया कि अतुल चौहान से विवाद पंचायत चुनाव से शुरू हुआ। भाजपा ने मेरे बेटे अमित चौहान को पंचायत चुनाव में भाजपा समर्थित प्रत्याशी बनाया। जबकि अतुल चौहान को टिकट नहीं मिला। जिसके बाद अतुल चौहान की ओर से अमित चौहान के खिलाफ शिकायतों का दौर शुरू हो गया। अतुल चौहान की ओर से सैंकड़ों शिकायती पत्र अमित चौहान के खिलाफ दिए गए। हालांकि शिकायतों और जांच का सिलसिला चलता रहा।
लेकिन अब शिकायतों के बाद प्रकरण बढ़कर गोली चलने की घटना तक पहुंच गई। अमित और सचिन की मां उषा देवी ने रोते बिलखते अपना दर्द सांझा किया। मां उषा की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे, वहीं सचिन का मासूम बेटा हर शाम अपनी मां से बस एक ही सवाल पूछता है, “पापा कब आएंगे?”
सचिन चौहान की पत्नी सदमे में है, जबकि बहन मायके आकर भाभी को ढांढस बंधा रही है। गांव में डर और असुरक्षा का माहौल है। पीड़ित मां उषा देवी का कहना है कि प्रशासन से न्याय की पूरी उम्मीद है।
लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है, क्या पर्दे के पीछे की राजनीति एक परिवार को पूरी तरह बर्बाद कर देगी, या प्रशासन समय रहते सच्चाई सामने लाकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेगा?


