हरिद्वार। अलीगढ़ के खैर में 26 सितंबर की रात बाइक शोरूम स्वामी की हुई हत्या में शामिल महामंडलेश्वर व अखिल भारत हिंदू महासभा की राष्ट्रीय सचिव अन्नपूर्णा भारती स्वामी आनन्द स्वरूप महाराज की शिष्या थी। गुरुद्रोह के कारण स्वामी आनन्द स्वरूप ने अन्नपूर्णा भारती को आश्रम से निकाला था। आन्नपूर्णा भारती संत समाज मंे एक मात्र ऐसी महामण्डलेश्वर हैं, जो भारती और पुरी दोनों आसपद का इस्तेमाल अपने नाम के साथ करती थीं। प्रयागराज कुंभ में भी इनके बड़े-बड़े पोस्टर बैनरों में अन्नपूर्णा भारती पुरी छपा हुआ था। जबकि किसी भी व्यक्ति के नाम के बाद उसका एक ही सरनेम होता है, जबकि अन्नपूर्णा भारती और पुरी दशनाम के दोनों नामों का प्रयोग किया करती थी।
स्वामी आनन्द स्वरूप ने बताया कि अन्नपूर्णा भारती पुरी (पूजा शकुन पांडेय) व उसके पति अशोक पांडेय ने अभिषेक को मारने के लिए तीन लाख की सुपारी दी थी। दोनों की प्रवृत्ति ब्लैकमेलर की रही है। अन्नपूर्णा भारती स्वामी आनन्द स्वरूप की शिष्या थीं। स्वामी आनन्द स्वरूप ने ही पूजा शकुन पांडेय को अन्नपूर्णा भारती नाम दिया था। मृतक अभिषेक अन्नपूर्णा को ही स्वामी आनन्द स्वरूप महाराज के पास लेकर आता था। अभिषेक पूर्ण रूप से अन्नपूर्णा के प्रति समर्पित था।
स्वामी आनन्द स्वरूप के मुताबिक दोनों पति-पत्नी ब्लैकमेलर थे। दोनों लोगों की बात रिकार्डिंग कर फिर अपना खेल खेला करते थे। अन्नपूर्णा भारती की कारगुजारियों के कारण स्वामी आनन्द स्वरूप ने अन्नपूर्णा भारती को आश्रम से निकाल दिया था और अपना शिष्य मानने से भी इंकार कर दिया था। इसके बाद अन्नपूर्णा भारती दिल्ली जा पहुंची और स्वामी आनन्द स्वरूप महाराज से अपने कृत्यों के लिए क्षमा मांगी।
कहते हैं न कि चोर चोरी से चला जाए मगर हेराफरी से नहीं जाता, ठीक ऐसा ही अन्नपूर्णा भारती पुरी ने किया। माफी मांगने के बाद अन्नपूर्णा भारती ने गुरु ंिनंदा के साथ उनके भक्तों को बरगलाना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं अन्नपूर्णा ने स्वामी आनन्द रूवरूप महाराज के शिष्यों को भी ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया, जिसके बाद अन्नपूर्णा भारती पुरी की एंट्री स्वामी आनन्द स्वरूप महाराज के यहां पूरी तरह से बैन हो गयी।
ऐसे कृत्य कर अन्नपूर्णा भारती पुरी ने गुरुद्रोह का कार्य किया। इस संबंध में स्वामी आनन्द स्वरूप महाराज का कहना है कि ऐसे दुर्जन उनके शिष्य नहीं ंहो सकते। इनके कृत्य आरम्भ से ही अपराध वाली प्रवृत्ति के रहे हैं। इनके लिए जो बड़ी से बड़ी सजा हो वह मिलनी चाहिए। यह अपराध अक्षम्य है और गुरु से द्रोह करने वाले को किसी और को भी अपना शिष्य नहीं बनाना चाहिए।


