त्र्यंबकेश्वर में वैदिक विधि-विधान से स्थापित हुआ धर्म ध्वजा स्तंभ

संत-महंतों, पुरोहितों और मंत्रियों ने लिया कुंभ को निर्विघ्न संपन्न कराने तथा सनातन संस्कृति के प्रसार का संकल्प


त्र्यंबकेश्वर। भगवान शिव की नगरी और मां गोदावरी के प्रकट स्थल त्र्यंबकेश्वर में कुंभ पर्व की तैयारियों के बीच धर्म ध्वजा स्तंभ की विधिवत स्थापना की गई। पुरोहित महासंघ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में संत-महंतों, महामंडलेश्वरों, पुरोहित समाज, मेला प्रशासन और मंत्रियों की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ पीतल के धर्म ध्वजा स्तंभ की स्थापना की गई। इस दौरान सनातन धर्म को विश्व पटल पर मजबूती से स्थापित करने, सनातन संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने और कुंभ पर्व को निर्विघ्न एवं सकुशल संपन्न कराने का संकल्प लिया गया।


पुरोहित महासंघ की ओर से स्थापित इस धर्म ध्वजा स्तंभ को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया। स्तंभ पर समुद्र मंथन से जुड़ी विभिन्न लीलाओं और प्रसंगों को चित्रों के माध्यम से उकेरा गया है, जो भारतीय धार्मिक परंपराओं और पौराणिक मान्यताओं को दर्शाते हैं। इसकी कलात्मक बनावट इसे विशेष दर्शनीय स्वरूप प्रदान करती है। धर्म ध्वजा स्तंभ की स्थापना में सरकार और संत समाज की भी भागीदारी रही।


इस अवसर पर श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण के श्रीमहंत दुर्गादास महाराज ने कहा कि कुंभ भारतीय संस्कृति की विश्वव्यापी पहचान और सनातन धर्म का सबसे बड़ा पर्व है। कुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि धर्म ध्वजा स्तंभ सनातन परंपरा की महत्ता को प्रदर्शित करता है। समुद्र मंथन के प्रसंगों को चित्रों के माध्यम से उकेरकर भारतीय संस्कृति और पौराणिक विरासत को सजीव रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।


उन्होंने बताया कि धर्म ध्वजा स्तंभ की स्थापना के अवसर पर कुंभ मेला मंत्री, मेला प्रशासन के अधिकारियों, पुरोहित समाज के प्रतिनिधियों और विभिन्न अखाड़ों के संत-महंतों की उपस्थिति में धार्मिक परंपराओं के संरक्षण तथा कुंभ पर्व को सफल बनाने का संकल्प लिया गया। सभी ने सनातन संस्कृति के व्यापक प्रचार-प्रसार और धार्मिक विरासत की रक्षा के लिए मिलकर कार्य करने पर जोर दिया।


कार्यक्रम में श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के श्रीमहंत रमेश गिरी, उदासीन बड़ा अखाड़े के सत मुनि सहित विभिन्न अखाड़ों के संत-महंत, महामंडलेश्वर, कुंभ मेला प्रशासन के अधिकारी, पुरोहित महासंघ के प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। धर्म ध्वजा स्तंभ की स्थापना को कुंभ पर्व की तैयारियों और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया।


संतों ने संकल्प लिया कि कुंभ पर्व की सभी व्यवस्थाओं को आपसी समन्वय से पूरा करते हुए आयोजन को निर्विघ्न एवं सकुशल संपन्न कराया जाएगा। साथ ही सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचाने और भावी पीढ़ियों तक भारतीय धार्मिक विरासत का संदेश पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

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