आरटीआई के जवाब में निकली गोलगप्पों की रेट लिस्ट

लक्सर नगर पालिका की बड़ी लापरवाही सोशल मीडिया पर वायरल
विनाद धीमान
हरिद्वार।
पर्दे में रहने दो, पर्दा न उठाओ, पर्दा जो उठ गया तो भेद खुल जाएगा, यह गीत इन दिनों लक्सर नगर पालिका पर बिल्कुल सटीक बैठता नजर आ रहा है। मामला नगर पालिका के अंतर्गत कराए गए विकास कार्यों से जुड़ा है, लेकिन सामने आई लापरवाही ने सभी को हैरान कर दिया है।


लक्सर निवासी शिवम कश्यप ने बताया कि उन्होंने नगर पालिका क्षेत्र में हुए विकास कार्यों तथा समाचार पत्रों में प्रकाशित टेंडरों से संबंधित जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी थी। नगर पालिका कर्मचारियों द्वारा मांगी गई सूचना के आधार पर संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां आवेदक को उपलब्ध करा दी गईं।


जब आवेदक ने इन दस्तावेजों की जांच की, तो उन्हें उनमें एक चौंकाने वाली प्रति मिली। दस्तावेजों के बीच एक प्रतिष्ठित मिष्ठान की दुकान हरि ओम बीकानेर मिष्ठान भंडार की प्रमाणित रेट लिस्ट भी संलग्न थी। इस सूची में चाट-पकौड़ी और गोलगप्पों की कीमतें दर्ज थीं। यह देखकर आवेदक कुछ देर तक मुस्कुराता रहा, लेकिन बाद में उसने इस रेट लिस्ट को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा कर दिया। इसके बाद यह मामला तेजी से वायरल हो गया।


बड़ा सवाल यह है कि आरटीआई के जवाब में एक निजी दुकान की रेट लिस्ट, वह भी प्रमाणित प्रति के रूप में, कैसे शामिल हो गई? नगर पालिका स्वयं कोई चाट-गोलगप्पे की दुकान नहीं चलाती। हालांकि, नगर क्षेत्र में स्ट्रीट वेंडर्स को लाइसेंस जारी करना और स्वास्थ्य व स्वच्छता मानकों की निगरानी करना उसकी जिम्मेदारी जरूर है।


मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कोई कह रहा है कि अब गोलगप्पों का भाव भी आरटीआई से पता चलेगा! तो किसी ने इसे आरटीआई का अब तक का सबसे दिलचस्प उपयोग बताया। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा


कि हमें लगा था कि नगर पालिका टैक्स और विकास कार्यों की जानकारी देगी, लेकिन गोलगप्पों की रेट बताकर सबको चौंका दिया। शायद अगली आरटीआई में समोसे और बटाटे के दाम भी पूछे जाएंगे।


जब इस संबंध में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी मोहम्मद कामिल से बात की तो उन्होंने बताया कि एक आवेदक द्वारा विकास कार्यों को लेकर सूचना मांगी थी। सूचना में दिए गए दस्तावेजों में गलती से यह बिल भी चला गया होगा। मिठाई की दुकानों से होली, दीपावली पर मिठाई मंगाई जाती है। हो सकता है वह रेट लिस्ट गलती से चली गई हो सोमवार को कर्मचारियों से पूछताछ करेंगे।


यह घटना न सिर्फ नगर पालिका की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आरटीआई कानून के तहत सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कोई भी जानकारी सार्वजनिक हो सकती है, चाहे वह विकास कार्यों से जुड़ी हो या गलती से संलग्न हुआ स्ट्रीट फूड का बाजार भाव।

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