आठ अखाड़ों के समर्थन से कराए गए रजिस्ट्रेशन के बाद दूसरे गुट के ऐलान से टकराव के आसार, अखाड़ा परिषद की एकजुटता पर फिर उठे सवाल
हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में दो गुटों के बीच चल रहा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। एक गुट की ओर से अखाड़ा परिषद का रजिस्ट्रेशन कराए जाने के बाद अब दूसरे गुट के महामंत्री हरि गिरि महाराज ने एक हजार संतों द्वारा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नाम से रजिस्ट्रेशन कराने की बात कही है। उनके इस बयान के बाद संत समाज में विवाद और गहराने की आशंका जताई जा रही है। उनके मुताबिक उन्होंने अपने अखाड़े के संतों और महामण्डलेश्वरों को अखाड़ा परिषद के नाम से रजिस्ट्रेशन करने के निर्देश दे दिए जाने की बात कही है।
दरअसल, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद को लेकर संतों के बीच लंबे समय से दो गुट बने हुए हैं। हाल ही में श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज के नेतृत्व में आठ अखाड़ों के समर्थन से परिषद का रजिस्ट्रेशन कराया जा चुका है। इस संस्था के नाम से संबंधित सभी 13 अखाड़ों के नाम भी शामिल किए गए हैं।
इस रजिस्ट्रेशन के बाद परिषद के नाम और उसके अधिकारों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। एक पक्ष का दावा है कि रजिस्ट्रेशन होने के बाद उसी नाम से दूसरी संस्था का पंजीकरण कराना कानूनी रूप से संभव नहीं होगा। वहीं, सूत्रों के मुताबिक, परिषद के नाम पर कॉपीराइट का दावा भी किया गया है और जल्द ही इस संबंध में प्रक्रिया पूरी होने की संभावना जताई जा रही है।
दूसरे गुट के ऐलान से बढ़ी टकराव की आशंका
इसी बीच दूसरे गुट के महामंत्री हरि गिरि महाराज की ओर से एक हजार अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नाम से रजिस्ट्रेशन कराने की बात कहे जाने से विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। उनके इस बयान को मौजूदा विवाद के बीच दूसरे गुट की ओर से अपनी ताकत दिखाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
यदि दोनों गुट एक ही नाम से परिषद के संचालन और पदों पर अपना दावा करते हैं, तो विवाद कानूनी रूप भी ले सकता है। जानकारों का मानना है कि एक नाम से संस्था पंजीकृत हो जाने के बाद दूसरे व्यक्ति एक ही नाम से संस्था का द्वारा पंजीकरण कराया जाना संभव नहीं है।

