याचिका में रावण की विद्वता, शिवभक्ति और साहित्यिक पक्ष को सामने लाने की पैरवी
हरिद्वार। दशहरे पर रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलों के दहन की परंपरा को लेकर हरिद्वार के पांच अधिवक्ताओं ने उत्तराखंड राज्य मानवाधिकार आयोग, देहरादून में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने रावण के पुतला दहन को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए इसके आयोजन पर रोक लगाने और रावण के विद्वतापूर्ण, धार्मिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक पक्षों को सामने लाने की मांग की है।
याचिका दायर करने वालों में अधिवक्ता अरुण भदोरिया, अधिवक्ता कमल भदोरिया, अधिवक्ता सुमेधा भदोरिया, एलएलबी के छात्र चेतन भदोरिया और अधिवक्ता रेखा पांडे शामिल हैं। याचिका में उत्तराखंड शासन के गृह एवं संस्कृति विभाग, पुलिस महानिदेशक, प्रदेश के समस्त जिलाधिकारियों, नगर निकायों और दशहरा आयोजन समितियों को पक्षकार बनाया गया है।
रावण के विद्वता और शिवभक्ति वाले पक्ष पर जोर
याचिका में कहा गया है कि रावण को केवल नकारात्मक पात्र के रूप में देखने के बजाय उसके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं का भी अध्ययन किया जाना चाहिए। भारतीय रामायण परंपराओं में रावण को लंकापति, विद्वान, भगवान शिव का अनन्य भक्त तथा वेदों और शास्त्रों का ज्ञाता बताया गया है। उसके नाम से प्रचलित शिव तांडव स्तोत्र का भी भारतीय संस्कृत काव्य और भक्ति परंपरा में विशेष स्थान है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि रावण की विद्वता, तपस्या, संगीत संबंधी ज्ञान, शिवभक्ति और राजकीय शक्ति जैसे पक्षों पर भी समाज में चर्चा होनी चाहिए। हालांकि, किसी भी ग्रंथ की वास्तविक रचना और ऐतिहासिक प्रमाणिकता का आकलन स्वतंत्र प्रमाणों के आधार पर किया जाना चाहिए।
पुतला दहन के बजाय वैकल्पिक कार्यक्रमों की मांग
याचिका में मांग की गई है कि रावण के पुतले का दहन न किया जाए और इसके लिए किसी को प्रेरित भी न किया जाए। इसके स्थान पर अथवा पुतला दहन के साथ ज्ञान, साहित्य, नैतिकता और सामाजिक सुधार पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। रामायण की विभिन्न क्षेत्रीय एवं साहित्यिक परंपराओं पर संगोष्ठियां और शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव भी दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि दशहरे के अवसर पर समाज को अहंकार, अन्याय, हिंसा, स्त्री-असम्मान और अनैतिक आचरण के त्याग का संदेश दिया जाना चाहिए। ज्ञान और विद्वता के साथ सदाचार, विनम्रता, न्याय तथा स्त्री सम्मान जैसे मूल्यों को भी समान महत्व दिया जाना आवश्यक है।
पर्यावरण और सुरक्षा के पहलुओं का भी उल्लेख
याचिका में दशहरा आयोजनों के दौरान आतिशबाजी से होने वाले वायु एवं ध्वनि प्रदूषण, भीड़ प्रबंधन और अग्नि सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने धार्मिक संगठनों, विद्वानों, संबंधित समुदायों और नागरिक समाज से परामर्श कर शांतिपूर्ण एवं वैकल्पिक उत्सवों को प्रोत्साहित करने की मांग की है। इसके अलावा रावण से संबंधित धार्मिक एवं साहित्यिक परंपराओं के प्रमाणित स्रोतों पर आधारित अध्ययन सामग्री तैयार कर लोगों को उसके व्यक्तित्व के विभिन्न पक्षों की जानकारी देने का सुझाव दिया गया है। याचिका में राज्य सरकार के गृह एवं संस्कृति विभाग से इस विषय पर उनका पक्ष और उपलब्ध नीतिगत जानकारी प्राप्त करने पर विचार करने का अनुरोध भी किया गया है।

