अशोक सिंघल के बताए रास्ते पर चलेगी सरकार, धर्मांतरण पर कानून का दिख रहा असर: धामी
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनकी सरकार अशोक सिंघल के बताए रास्ते पर चलते हुए राष्ट्र सेवा, हिंदू समाज के संगठन और धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए काम कर रही है। उत्तराखंड में धर्मांतरण रोकने के लिए सख्त कानून लागू किया गया है, जिसका असर दिखाई देने लगा है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में धर्मांतरण की घटनाओं में काफी कमी आई है और सरकार के प्रयासों से कई लोगों की घर वापसी भी हो रही है। इसके साथ ही अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अब तक करीब 13 हजार एकड़ भूमि कब्जामुक्त कराई गई है।

मुख्यमंत्री रविवार को विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित अशोक सिंघल जन्म शताब्दी वर्ष के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। पटेलनगर स्थित महंत इंद्रेश अस्पताल के राजकीय दून मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने विहिप के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन सादगी, राष्ट्र सेवा और करोड़ों हिंदुओं की आस्था के प्रति समर्पित रहा। हिंदू समाज को संगठित करने में उनका योगदान हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

सीएम धामी ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण अशोक सिंघल के संघर्षों और योगदान का परिणाम है। यदि वह आज जीवित होते तो मंदिर निर्माण देखकर बेहद प्रसन्न होते। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गोहत्या रोकने के लिए बनाए गए सख्त कानून को प्रभावी ढंग से लागू कर रही है। साथ ही प्राचीन धार्मिक स्थलों के संरक्षण और विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। हाल ही में हरिपुर, कालसी में यमुना घाट का निर्माण कराया गया है, जहां नियमित रूप से मां यमुना की आरती हो रही है। मुख्यमंत्री ने विश्वास दिलाया कि सरकार अशोक सिंघल के विचारों और उनके बताए मार्ग पर चलकर आगे भी कार्य करती रहेगी।
सादगी और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित रहा अशोक सिंघल का जीवन
कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने अशोक सिंघल के जीवन और योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सिंघल का पूरा जीवन देश की एकता, हिंदू धर्म की रक्षा और समाज को संगठित करने के लिए समर्पित रहा। बचपन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रज्जू भैया के संपर्क में आने के बाद उन्होंने राष्ट्र और धर्म की सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया।

चंपत राय ने बताया कि विज्ञान के छात्र रहे अशोक सिंघल ने वर्ष 1950 में विज्ञान की पढ़ाई छोड़कर हिंदी ग्रंथों और मठ-मंदिरों की सेवा का मार्ग चुना। उनका जीवन सादगीपूर्ण था। उन्होंने अनेक राष्ट्रीय सम्मेलनों और धर्म संसदों का आयोजन कर साधु-संतों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि अशोक सिंघल के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से भी मैत्रीपूर्ण संबंध थे। चंपत राय ने केरल के एक गांव में कथित मतांतरण श्रद्धेयका विरोध किए जाने का प्रसंग साझा करते हुए कहा कि इस मामले में इंदिरा गांधी ने भी विरोध जताया था।
धर्म संसदों के जरिए साधु-संतों को किया एकजुट
चंपत राय ने कहा कि अशोक सिंघल ने नई दिल्ली में धर्म संसदों का आयोजन किया, जिनमें 600 से अधिक साधु-संतों ने भाग लिया। उन्होंने देश के प्रमुख अखाड़ों को एकजुट करने के साथ गंगा, गाय और हिंदू धर्म की रक्षा तथा समाज में देशभक्ति की भावना मजबूत करने के लिए लगातार काम किया।
उन्होंने बताया कि अस्सी के दशक में पंजाब में अशांति के दौरान अशोक सिंघल ने वहां जाने का निर्णय लिया। उन्होंने हरकी पैड़ी से हिमेंद्र साहब तक सद्भावना यात्रा निकालकर हिंदुओं को एकजुट रहने का संदेश दिया। वर्ष 1986 में उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर का प्रारंभिक नक्शा तैयार किया। मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों की जांच आईआईटी रुड़की की प्रयोगशाला में कराई गई।
चंपत राय ने कहा कि वर्ष 1994 में बनारस में आयोजित हिंदू सम्मेलन के दौरान अशोक सिंघल अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति को संतों के बीच लेकर आए। उनका मानना था कि हिंदू और बौद्ध समाज बड़ी शक्ति हैं और सभी हिंदू एक हैं। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान वह ममता बनर्जी और मधु दंडवते सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से भी मिलते थे।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि अशोक सिंघल ने वर्ष 2012 में ही नेतृत्व परिवर्तन की आवश्यकता जताते हुए नरेंद्र मोदी को कमान सौंपने की बात कही थी।
कार्यक्रम में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज सहित विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और विश्व हिंदू परिषद के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम में अशोक सिंघल के जीवन, विचारों और सामाजिक योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया गया।

