हीरो रियल्टी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग
हरिद्वार। रोशनाबाद स्थित सरकारी भूमि को लेकर विवाद एक बार फिर गरमा गया है। प्रेस क्लब हरिद्वार में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कांग्रेस नेता वरुण बालियान ने आरोप लगाया कि जिला मुख्यालय क्षेत्र में उत्तराखंड सरकार की करीब 135 बीघा भूमि पर कथित तौर पर कब्जा कर कॉलोनी विकसित की जा रही है। उन्होंने मामले में संबंधित कंपनी और अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने तथा सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराकर सरकार में निहित करने की मांग की।
बालियान ने आरोप लगाया कि हीरो रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड के नाम राजस्व अभिलेखों में भूमि दर्ज नहीं होने के बावजूद कंपनी द्वारा ग्राम आन्नेकी हेतमपुर क्षेत्र में कॉलोनी विकसित की जा रही है। उन्होंने हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण से स्वीकृत ले-आउट की वैधता पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि सरकारी भूमि पर कॉलोनी विकसित करने के लिए अनुमति और स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों की जांच आवश्यक है। आरोप लगाया कि संबंधित भूमि की रजिस्ट्रियां खसरा नंबरों का स्पष्ट उल्लेख किए बिना की गई हैं, जिससे खरीदारों के हित प्रभावित होने की आशंका है।
दो वर्ष में निर्धारित प्रयोजन पर उपयोग नहीं करने का आरोप
बालियान के अनुसार, 18 दिसंबर 2007 को उत्तराखंड शासन ने ग्राम आन्नेकी हेतमपुर में धारा 154(4) के अंतर्गत आवासीय प्रयोजन के लिए 20 हेक्टेयर भूमि खरीदने की अनुमति दी थी। उनका दावा है कि संबंधित कंपनी द्वारा निर्धारित अवधि में भूमि का उपयोग स्वीकृत प्रयोजन के अनुसार नहीं किया गया। इसके बाद बची भूमि के स्वामित्व, हस्तांतरण और वर्तमान राजस्व स्थिति की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि एयरो इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, हीरो रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड और हीरो रियल्टी लिमिटेड के नामों से संबंधित भूमि के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है। उनके मुताबिक, भूमि हस्तांतरण और खतौनी में नाम दर्ज होने से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्वामित्व निर्धारित किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री से लेकर जिला प्रशासन तक शिकायत का दावा
बालियान ने बताया कि इस मामले में शिकायतकर्ता राजेश कुमार ने मुख्यमंत्री और शासन स्तर पर भी शिकायतें की। उनके अनुसार, शिकायतों के आधार पर हुई जांच में एसडीएम स्तर पर हीरो रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड के नाम राजस्व अभिलेखों में भूमि दर्ज नहीं होने की बात सामने आई थी। उन्होंने कहा कि 27 फरवरी 2025 को धारा 154(4) के तहत जिलाधिकारी न्यायालय में भी वाद प्रस्तुत किया गया था। इसके बावजूद उनके अनुसार, लंबे समय से जांच चलने के बावजूद मामले में निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिलाधिकारी स्तर से जांच पूरी कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
धरना दोबारा शुरू करने की चेतावनी
बालियान के अनुसार, शिकायतकर्ता राजेश कुमार ने 5 अगस्त 2026 को जिला मुख्यालय पर धरना दिया था। उस दौरान अपर जिलाधिकारी की ओर से कार्रवाई का आश्वासन मिलने का दावा किया गया, लेकिन शिकायतकर्ता के मुताबिक अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर सरकारी भूमि को सरकार में निहित कराने की दिशा में कार्रवाई नहीं की गई, तो राजेश कुमार दोबारा धरना शुरू करेंगे। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की कि राजस्व अभिलेखों, भूमि हस्तांतरण के दस्तावेजों, ले-आउट स्वीकृति और रजिस्ट्रियों की जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। प्रेसवार्ता के दौरान मुरली मनोहर आदि मौजूद रहे।

