महंताई विवाद में अंतरिम राहत, मामले के निस्तारण तक विपक्षियों के हस्तक्षेप पर रोक
मुरादाबाद। लाल बाग स्थित श्री काली माता मंदिर की महंताई और प्रबंधन को लेकर चल रहे विवाद में सिविल कोर्ट ने महंत रामगिरि को अंतरिम राहत दी है। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत ने 12 अक्तूबर को अंतरिम आदेश जारी करते हुए वाद के निस्तारण तक विपक्षी पक्ष को महंताई और मंदिर की व्यवस्था में हस्तक्षेप करने से रोक दिया है। मामले में अगली सुनवाई के लिए 27 नवंबर की तारीख निर्धारित की गई है।
अदालत में काली माता मंदिर आदि बनाम पंच दशनाम जूना अखाड़ा आदि के नाम से वाद दायर किया गया है। इसमें वादी पक्ष की ओर से स्थायी निषेधाज्ञा और घोषणात्मक डिक्री की मांग की गई है। महंत रामगिरि पक्ष ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर मंदिर की व्यवस्था में हस्तक्षेप रोकने की अपील की थी।
वादी पक्ष का आरोप है कि आठ अप्रैल 2026 को प्रतिवादी पक्ष के कुछ लोग मंदिर परिसर पहुंचे और एक पत्र दिखाकर मंदिर की देखभाल अपने हाथों में लेने का दावा किया। वादी पक्ष ने इसे अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए कहा कि प्रतिवादियों को इस प्रकार मंदिर की व्यवस्था अपने हाथ में लेने का कानूनी अधिकार नहीं है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि प्रतिवादी संख्या एक और दो को नोटिस की तामील होने के बावजूद उनकी ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। वहीं, प्रतिवादी संख्या तीन और चार ने दीवानी प्रक्रिया संहिता के आदेश सात, नियम 11 के तहत वाद खारिज करने का प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन अंतरिम निषेधाज्ञा की अर्जी पर कोई आपत्ति दाखिल नहीं की।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि प्रतिवादी पक्ष को जवाब और आपत्ति दाखिल करने के लिए पहले अंतिम अवसर दिया जा चुका था। इसके बावजूद जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद अदालत ने अंतरिम निषेधाज्ञा की अर्जी पर अंतिम निर्णय होने तक वादी पक्ष की महंताई और मंदिर की व्यवस्था में हस्तक्षेप पर रोक लगा दी।
महंत रामगिरि के अनुसार, अदालत के आदेश से उन्हें बड़ी काली माता मंदिर, छोटी काली माता मंदिर और रामगंगा मंदिर की व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी मिली है। उन्होंने कहा कि अब तीनों मंदिरों में पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक गतिविधियों का संचालन सुचारु रूप से कराया जाएगा। मामले में 27 नवंबर को अगली सुनवाई होगी, जिसमें अंतरिम निषेधाज्ञा की अर्जी और संबंधित आपत्तियों पर विचार किया जाएगा।

